Category: SANSKRIT SUB

  • शास्त्रकाराः

    1. शास्त्र क्या है ? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट करें। उत्तर- शास्त्र का अर्थ ज्ञान का शासक या निर्देशक तन्त्र है। मनुष्यों के कर्तव्य और अकर्तव्य विषयों की वह शिक्षा देता है। शास्त्र को ही आजकल अध्ययन । विषय कहते हैं। पश्चिमी देशों में शास्त्र को अनुशासन कहा जाता है। सांसारिक । विषयों…

  • विश्वशान्तिः

    1.’ ‘विश्वशान्तिः’ पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है ? उत्तर⇒ विश्वशान्तिः शब्द का शाब्दिक अर्थ विश्व की शान्ति है। आज सर्वत्र ईर्ष्या, द्वेष, असहिष्णुता, अविश्वास, असंतोष आदि जैसे दुर्गुण विद्यमान हैं। ये दुर्गुण जहाँ विद्यमान हो वहाँ की शान्ति की कल्पना कैसे की जा सकती है। शान्ति भारतीय दर्शन का मूल तत्व है। यह शान्ति…

  • कर्णस्य दानवीरता

    1.कर्ण की दानवीरता कैसे प्रकट होती है ? उत्तर दें। उत्तर⇒ कर्ण ब्राह्मवेशधारी इन्द्र को विनम्रतापूर्वक सर्वप्रथम भौतिक वस्तुएँ प्रदान करना चाहते यथा-गौ, हाथी, पृथ्वी । यहाँ तक कि अपने अग्निष्टों फल भी देना चाहते हैं और अन्ततः अपना सिर तक अर्पित करने के लिए उद्यत हो उठते हैं। परन्तु ब्राह्मणवेशधारी शक्र (इन्द्र) तो दृढ़…

  • व्याघ्रपथिककथा

    1. व्याघ्रपथिक कथा से क्या शिक्षा मिलती है ? अथवा, व्याघ्नपथिक कथा में मूल संदेश क्या है ? उत्तर⇒ नारायण पण्डित विरचित हितोपदेश के नीतिकथाग्रन्थ के मित्रलाभखण्ड से ली गयी कथा ‘व्याघ्रपण्डित’ है । इस कथा में एक पथिक वृद्ध व्याघ्र द्वारा दिये गये प्रलोभन में पड़ जाता है। वृद्ध व्याघ्र हाथ में सुवर्णकंकण लेकर…

  • मन्दाकिनीवर्णनम

    1.मंदाकिनी की शोभा का वर्णन किस रूप में किया गया है ? उत्तर ⇒ वनवास काल में जब राम सीता और लक्ष्मण के साथ चित्रकूट जाते हैं तब मंदाकिनी की प्राकृतिक सुषमा से प्रभावित हो जाते हैं। वे सीता से कहते हैं कि यह नदी प्राकृतिक उपादानों से संवलित चित्त को आकर्षित कर रही है।…

  • स्वामी दयानन्दः

    1. आधनिक भारत को स्वामी दयानंद का क्या योगदान है ? उत्तर⇒ आधुनिक भारत के समाज और शिक्षा के महान उद्धारक स्वामी दयानंद हैं। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता को दूर कर एक नये समाज की स्थापना की है। जातिवाद, अस्पृश्यता, धर्मकार्यों में आडम्बर आदि अनेक विषमताएँ थीं जिनसे समाज ग्रसित था । कर्मकांडी…

  • कर्मवीर कथा

    1.कर्मवीर कथा से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? उनर→ कर्मवीर शब्द से ही आभास होने लगता है कि निश्चय ही कोई ऐसा कर्मवीर है जो अपनी निष्ठा, उद्यम, सेवाभाव आदि के द्वारा उत्तम पद को प्राप्त किये हुए है। प्रस्तुत पाठ में एक ऐसे ही कर्मवीर की चर्चा है जो अभावग्रस्त जीवन-यापन करते हुए…

  • नीतिश्लोकाः

    1. पण्डित किसे कहा गया है ? पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट करें। उत्तर- महात्मा विदुर ने पण्डित की व्याख्या बड़े ही रोचक ढंग से की है। उनके मतानुसार पण्डित का अभिप्राय ब्राह्मण या विद्वान से नहीं है। धर्म एवं कर्म प्रवचनीय पण्डित सर्वत्र नहीं होते हैं। जिसका कार्य शीत, ऊष्ण, भय, प्रेम समृद्धि…

  • भारतीयसंस्काराः

    1. भारतीय संस्कार का वर्णन किस रूप में हुआ है ? उत्तर- भारतीय संस्कृति अनूठी है। जन्म के पूर्व संस्कार से लेकर मृत्यु के बाद अन्त्येष्टि संस्कार का अनुपम उदाहरण संसार के अन्य देशों में नहीं है। यहाँ की संस्कृति की विशेषता है कि जीवन में यहाँ समय-समय पर संस्कार मनाये जाते हैं। आज संस्कार…

  • भारतमहिमा

    1. मातृभूमि का वर्णन किस रूप में किया गया है ? पठित पाठ के आधार पर लिखें। उत्तर – हिमालय की गोद में बसा हुआ ‘भारत निश्चय ही स्वर्ग-सा सुन्दर है । कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एकता एवं समदर्शिता का भाव दृष्टिगत होता है। यह मातृभूमि निर्मल एवं ममतामयी है । यहाँ लोग धर्म,…